आशारोड़ी से लेकर माजरा तक की सभी स्ट्रीट लाइटें बंदः रमेश कुमार मंगू

एमडीडीए और नगर निगम का एक दूसरे पर दोषारोपण
देहरादून। वार्ड 78 टर्नर रोड में स्ट्रीट लाइट न होने से चारों ओर अंधेरे छाया हुआ है। स्ट्रीट लाइटों के बारे में निवर्तमान पार्षद रमेश कुमार मंगू ने कई बार नगर निगम में शिकायत भी की है लेकिन व्यवस्था आज भी जस की तस है जिसका खामियाजा क्षेत्रवासी भुगत रहे हैं।
निवर्तमान पार्षद रमेश कुमार मंगू ने उत्तराखंड हेड लाइंस के प्रमुख संवाददाता से बातचीत के दौरान बताया कि वार्ड 78 शहर के सबसे बड़ा वार्ड है। पार्षद रमेश कुमार मंगू ने कहा कि उत्तराखंड का प्रवेश द्वार आशारोड़ी से लेकर अंतर्राष्ट्रीय बस अड्डा व फ्लाईओवर पर माजरा तक स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं जिससे रात में अनहोनी दुर्घटनायें होती हैं। रात में चोरी-डकैती अलग होती हैं। ऐसे में स्ट्रीट लाइटों का बन्द होना दुर्भाग्यपूर्ण है।


उत्तराखंड हेड लाइंस को ऐसे ही शिकायतें कई वार्डों से मिली हैं जहां स्ट्रीट लाइटें नही लग पा रही हैं और चारों तरफ घुप अंधेरा पसरा रहता है। जिससे चोरों के होंसले भी बुलंद हो रखे हैं। गली- मौहल्लों में चोरी डकैती भी बड़ गई हैं। उत्तराखंड हेड लाइंस को छन-छन कर मिल रही नगर निगम के बारे में जानकारी के अनुसार यहां पर एलईडी रिपेयर ठेकेदारों को टेंडर निरस्तर हो चुके हैं जिससे स्ट्रीट लाइटों का मामला और गंभीरता जा रहा है जिससे स्ट्रीट लाइटें ठीक नहीं हो पा रही या नई नही लग पा रही है। जिसकी मार जनता झेल रही हैं।


वार्ड 78 टर्नर रोड के वासिंदे विभाग और ठेकेदारों के अंदरूनी मामला का खामियाजा भुगत रहे हैं। क्षेत्राय पार्षद का कहना था कि इन दिनों स्ट्रीट लाइटों का होना अति आवश्यक था लेंकन इन दिनां ही सारी स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हुई है। जिससे क्षेत्राय जनता में भी भारी आक्रोश है। इस वार्ड की कहानी यह है कि एमडीडीए और नगर निगम एक दूसरे पर पल्लू झाड़ रहे हैं। क्षेत्राय जनता का कहना है कि नगर निगम का कहना है कि यह कार्य एमडीडीए करेगा वहीं एमडीडीए कहता है कि यह कार्य नगर निगम का है। ऐसे में दोनो विभाग इस तरफ कोई ध्यान नही दे रहा है। जबकि 2018 से यह क्षेत्र नगर निगम के अस्तित्व में आ रखा है। अगर एमडीडीए को इस क्षेत्र में जो भी विकास कार्य करना हैं तो सीधे नगर निगम को विभागीय पत्राचार के माध्यम से समस्या का निस्तातरण करना चाहिए ताकि क्षेत्रीय जनता को इसकी मार न झेलनी पड़े।

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