दायित्वधारियों की तीसरी सूची जारी

ओमवीर सिंह राघव बने गन्ना विकास सलाहकार समिति उपाध्यक्ष

उत्तराखंड हेड लाइंस

देहरादून।  सरकार ने संगठन और शासन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने तथा पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं को साधने के लिए दायित्वधारियों की एक और नई सूची जारी कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा लगातार तीसरे दिन जारी की गई इस सूची से साफ है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व अब चुनाव से पहले हर स्तर पर सांगठनिक जमीन को मजबूत कर लेना चाहता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार इस कदम के जरिए दोहरा संदेश देने का प्रयास कर रही है। पहला यह कि लंबे समय से पार्टी के लिए जमीन पर पसीना बहा रहे वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की अनदेखी नहीं होगी। दूसरा, विभिन्न आयोगों और समितियों में इन कद्दावर नेताओं को जिम्मेदारी सौंपकर सरकार अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं को सीधे जनता तक और तेजी से पहुंचाना चाहती है।

सरकार द्वारा जारी ताजा सूची में विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को महत्वपूर्ण आयोगों और समितियों में उपाध्यक्ष की कमान सौंपी गई है।

ओमवीर सिंह राघवः उपाध्यक्ष, गन्ना विकास सलाहकार समिति (किसानों और गन्ना उत्पादकों के बीच पैठ मजबूत करने की जिम्मेदारी)।  धीरेंद्र पंवारः उपाध्यक्ष, मीडिया सलाहकार समिति (सरकार के कामकाज के प्रचार-प्रसार और मीडिया प्रबंधन को धार देने का जिम्मा)। भूपेंद्र कंडारीः उपाध्यक्ष, गौ सेवा आयोग (सांस्कृतिक और धार्मिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए अहम पद)। ले. कर्नल (सेनि.) रघुवीर सिंह भंडारीः उपाध्यक्ष, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति (सैन्य बहुल प्रदेश में पूर्व सैन्य अधिकारी के अनुभव का लाभ आपदा प्रबंधन में लेने का प्रयास)।
रणजीत सिंह नामधारीः उपाध्यक्ष, पशु कल्याण बोर्ड (पशु संरक्षण और कल्याण से जुड़ी योजनाओं को गति देने की जिम्मेदारी)।

किरनः उपाध्यक्ष, सीमांत क्षेत्र कार्यक्रम अनुश्रवण परिषद (सामरिक और राजनैतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमांत क्षेत्रों के विकास की निगरानी का अहम जिम्मा)।

गौरतलब है कि धामी सरकार ने पिछले तीन दिनों से लगातार दायित्वधारियों की सूचियां जारी कर चौंकाया है। इससे पहले भी कई वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न महत्वपूर्ण आयोगों, बोर्डों और समितियों में लाल बत्ती (दायित्व) से नवाजा जा चुका है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि “विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस तरह की नियुक्तियां रूठे हुए नेताओं को मनाने, क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने तथा पार्टी संगठन में नई ऊर्जा फूंकने का काम करती हैं। धामी सरकार इस वक्त किसी भी स्तर पर असंतोष का जोखिम नहीं उठाना चाहती।” लगातार हो रही इन नियुक्तियों से उत्तराखंड भाजपा संगठन के भीतर लंबे समय से इंतजार कर रहे कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।

 

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