इन्द्र बनना बडृी बात नही भक्त होना बड़ी बातः श्री सुधीर कृष्ण भारद्वाज
देहरादून। चन्द्रबनी वाइड-लाइफ निकट 21 मई से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसके मुख्य आयोजक चौहान परिवार है। श्रीमद्भागवत कथा में व्यास द्वारा नित्य नये प्रसंगों का कथावाचन किया जाता है।

इस अवसर पर वृन्दावन से आये पं. श्रद्धेय श्री सुधीर कृष्ण भारद्वाज के मुखार बिंदु कथाओं का प्रसंग किया जाता है। पावन क्षेत्र चन्द्रबनी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का छठवां दिन भक्ति, भाव और आध्यात्मिक आनंद से सराबोर रहा। इस विशेष दिन की कथा का मुख्य केंद्र बिंदु भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक बाल लीलाएं, गोवर्धन पूजा, छप्पन भोग और महारास का प्रसंग रहा।

पं. श्रद्धेय श्री सुधीर कृष्ण भारद्वाज ने व्यासपीठ से गोवर्धन लीला का अत्यंत मार्मिक और सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान कृष्ण ने देवराज इंद्र के अहंकार को चूर करने के लिए अपनी कनिष्ठ उंगली (छोटी उंगली) पर विशाल गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसके बाद कथा पंडाल में भव्य गोवर्धन पूजा और का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ भगवान की आरती उतारी और भजनों पर झूम उठे।

इसके पश्चात, महारास का प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि रास कोई लौकिक नृत्य नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा से परम मिलन है। छठे दिन की कथा का सार यह था कि जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर ईश्वर की शरण में जाता है, तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं।

श्रीमद्भागवत कथा के आयोजकों में श्रीमती विधा देवी, श्रीमती रामवेटी, विजेन्द्र सिंह चौहान, अशोक चौहान, कैलाश सिंह चौहान, महेश सिंह चौहान, राजेश सिंह चौहान, अनूप चौहान, आनन्द चौहान, अखिलेश चौहान, प्रलभ प्रता चौहान, आशू चौहान, राकश चौहान एवं समस्त चौहान परिवार को दूर-दूर से आये श्रद्धालु भक्तों ने धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर सहसपुर विधानसभा के विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, चन्द्रबनी पार्षद सुमन बुटोला, पूर्व पार्षद सुखवीर सिंह बुटोला, मंडल अघ्यक्ष मदन सिंह, अनिल ढकाल सहित सैकड़ों श्रद्धालु भक्त मौजूद थे।

चन्द्रबनी और आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ कमाया। अंत में महाआरती के बाद सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण “हरे कृष्णा” और “जय श्री राधे” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
